निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है
UPPCS · 6871 questions
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है
निम्नलिखित में से अविकारी शब्द नहीं है
अनेकार्थी शब्द 'पतंग' का इनमें से एक अर्थ नहीं है
निम्नलिखित में तत्सम शब्द है
'जिसका उत्तर देकर खण्डन किया गया हो।' इस वाक्यांश के लिए एक शब्द है
निम्नलिखित वाक्यों में से एक शुद्ध वाक्य है
इनमें से मुहावरा तथा उसके अर्थ को सुमेल कीजिए तथा सही विकल्प का चयन कीजिए। [मुहावरा-अर्थ तालिका: (क) छाती लगाना – (अ) प्रसन्नता से फूले न समाना; (ख) छाती पर साँप लोटना – (ब) बहुत अधिक दुःख या वेदना होना; (ग) छाती उमड़ना – (स) ईर्ष्या के कारण व्यथित होना; (घ) छाती फटना – (द) आलिंगन करना]
निम्नलिखित शब्दों में प्रेरणार्थक क्रिया है
आदर्शिका का तद्भव शब्द है
निम्नलिखित में कौन-सा वर्ण-तालव्य नहीं है?
इनमें से 'अरण्य' शब्द का पर्यायवाची शब्द है
निम्नलिखित में से एक शब्द की वर्तनी में हलन्त-सम्बन्ध अशुद्धि है, वह शब्द है
इनमें से 'किन्नर' का सन्धि-विच्छेद है
पश्चिमी हिन्दी का विकास किस अपभ्रंश से हुआ है?
तत्सम-तद्भव शब्दों का कौन-सा युग्म असंगत है?
प्रश्न संख्या 16 से 20 के लिए : अधोलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न संख्या 16 से 20 के उत्तर इस गद्यांश के आधार पर दीजिए: हमारा जीवन पाखण्डमय बन गया है और हम इसके बिना रह नहीं सकते हैं। अपने सार्वजनिक जीवन अथवा निजी जीवन में कहीं भी देखें हम एक दूसरे को छलने की कला का खुलकर उपयोग करते हैं, इसके बावजूद यह विश्वास करते हैं कि हम ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं। हम इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं जिसकी उस अवसर पर कोई आवश्यकता नहीं होती। हम किसी भी बात को यह जानते हुए कि वह सही अथवा सत्य नहीं है लेकिन उसके प्रति निष्ठा या विश्वास इस तरह प्रकट करते हैं जैसे हमारे लिए वही एक मात्र सत्य है। हम सब इसलिए सरलता से कर लेते हैं क्योंकि आज पाखण्ड एवं दिखावा हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। आज हम में से अधिकांश लोगों की स्थिति 'मुँह में कुछ और' वाली बन गयी है। Q: यह जानते हुए कि बात गलत है, हम उसके प्रति निष्ठा क्यों प्रकट करते हैं क्योंकि
प्रश्न संख्या 16 से 20 के लिए : अधोलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न संख्या 16 से 20 के उत्तर इस गद्यांश के आधार पर दीजिए: हमारा जीवन पाखण्डमय बन गया है और हम इसके बिना रह नहीं सकते हैं। अपने सार्वजनिक जीवन अथवा निजी जीवन में कहीं भी देखें हम एक दूसरे को छलने की कला का खुलकर उपयोग करते हैं, इसके बावजूद यह विश्वास करते हैं कि हम ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं। हम इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं जिसकी उस अवसर पर कोई आवश्यकता नहीं होती। हम किसी भी बात को यह जानते हुए कि वह सही अथवा सत्य नहीं है लेकिन उसके प्रति निष्ठा या विश्वास इस तरह प्रकट करते हैं जैसे हमारे लिए वही एक मात्र सत्य है। हम सब इसलिए सरलता से कर लेते हैं क्योंकि आज पाखण्ड एवं दिखावा हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। आज हम में से अधिकांश लोगों की स्थिति 'मुँह में कुछ और' वाली बन गयी है। Q: गद्यांश का उपर्युक्त शीर्षक है
प्रश्न संख्या 16 से 20 के लिए : अधोलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न संख्या 16 से 20 के उत्तर इस गद्यांश के आधार पर दीजिए: हमारा जीवन पाखण्डमय बन गया है और हम इसके बिना रह नहीं सकते हैं। अपने सार्वजनिक जीवन अथवा निजी जीवन में कहीं भी देखें हम एक दूसरे को छलने की कला का खुलकर उपयोग करते हैं, इसके बावजूद यह विश्वास करते हैं कि हम ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं। हम इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं जिसकी उस अवसर पर कोई आवश्यकता नहीं होती। हम किसी भी बात को यह जानते हुए कि वह सही अथवा सत्य नहीं है लेकिन उसके प्रति निष्ठा या विश्वास इस तरह प्रकट करते हैं जैसे हमारे लिए वही एक मात्र सत्य है। हम सब इसलिए सरलता से कर लेते हैं क्योंकि आज पाखण्ड एवं दिखावा हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। आज हम में से अधिकांश लोगों की स्थिति 'मुँह में कुछ और' वाली बन गयी है। Q: 'मुँह में राम बगल में छुरी' इसका अर्थ इनमें से किस वाक्य से पता चलता है?
प्रश्न संख्या 16 से 20 के लिए : अधोलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न संख्या 16 से 20 के उत्तर इस गद्यांश के आधार पर दीजिए: हमारा जीवन पाखण्डमय बन गया है और हम इसके बिना रह नहीं सकते हैं। अपने सार्वजनिक जीवन अथवा निजी जीवन में कहीं भी देखें हम एक दूसरे को छलने की कला का खुलकर उपयोग करते हैं, इसके बावजूद यह विश्वास करते हैं कि हम ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं। हम इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं जिसकी उस अवसर पर कोई आवश्यकता नहीं होती। हम किसी भी बात को यह जानते हुए कि वह सही अथवा सत्य नहीं है लेकिन उसके प्रति निष्ठा या विश्वास इस तरह प्रकट करते हैं जैसे हमारे लिए वही एक मात्र सत्य है। हम सब इसलिए सरलता से कर लेते हैं क्योंकि आज पाखण्ड एवं दिखावा हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। आज हम में से अधिकांश लोगों की स्थिति 'मुँह में कुछ और' वाली बन गयी है। Q: 'छलने की कला का' हम किस प्रकार उपयोग करते हैं?
प्रश्न संख्या 16 से 20 के लिए : अधोलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न संख्या 16 से 20 के उत्तर इस गद्यांश के आधार पर दीजिए: हमारा जीवन पाखण्डमय बन गया है और हम इसके बिना रह नहीं सकते हैं। अपने सार्वजनिक जीवन अथवा निजी जीवन में कहीं भी देखें हम एक दूसरे को छलने की कला का खुलकर उपयोग करते हैं, इसके बावजूद यह विश्वास करते हैं कि हम ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं। हम इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं जिसकी उस अवसर पर कोई आवश्यकता नहीं होती। हम किसी भी बात को यह जानते हुए कि वह सही अथवा सत्य नहीं है लेकिन उसके प्रति निष्ठा या विश्वास इस तरह प्रकट करते हैं जैसे हमारे लिए वही एक मात्र सत्य है। हम सब इसलिए सरलता से कर लेते हैं क्योंकि आज पाखण्ड एवं दिखावा हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। आज हम में से अधिकांश लोगों की स्थिति 'मुँह में कुछ और' वाली बन गयी है। Q: हमने जीवन का अभिन्न अंग किसे बना लिया है?